जन्म दैत अछि माँ बाप करम तऽ अपनेही, भाग ~ ८

करम के डोर सँ बान्धल अछि जिनगीकऽ एक कहानी

जन्म दैत अछि माँ बाप करम तऽ अपनेही
भाग ~ ८ 




( साँझ होइते राक्षस अपन बासस्थान पर वापस आवै छथि आ अपन बेटी के मूडी लाल तलवार सँ जोडैत छथि । लाल कनियाँ उठि के अपन पिता के प्रणाम करैत छैक । )

लाल कनियाँ : प्रणाम पिता जी ।

राक्षस : खुश रहू ! बेटी आई हमरा एम्हर मनुष्य के गन्ध आबि रहल अछि ।

लाल कनियाँ : पिता जी ऐठाम तऽ एकटा हम्ही, हम्ही मनुष्य छी हमरे गन्ध अवैत हेत । अहाँक  एम्हर तऽ दोसर कियो नै छथि । पिताजी आई हम अहाँ सँ एकटा बात पुछ चाहैत छी यदी अहाँ सँच - सँच बताईब तेँ हम पुछब ।

राक्षस : हँ पुछु की बात पुछ चाहैत छी । हम सँच - सँच बता देब ।

लाल कनियाँ : ई नारियल के गाछमें खोता जे छनि ओईमहक पंक्षी मैना कहियो ने कतौं जाई छैक कि बात छै अईमें पिताजी हमरा अपने सँच - सँच बताबु ।

राक्षस : देखु बेटी हम अहाँ के बतावै छी ध्यान दऽ के सुनु । ई नारियल के गाछ में जे मैना छै उ हमर प्राण छी । हमरा कोई नै मारि सकै छथि । हमरा मर लेल उ खोताकऽ मैना के मार पडतै तहने हम मरब नै तऽ नै ! एकर लेल ई लाल तलवारसँ नारियलकऽ गाछ के एक छह में  काटि के गिरावे पडतै बादमें ओई मैना के मारतै तब हम मरब नै तऽ हम नै मरि सकैत अछि ।

लाल कनियाँ : लिय पिता जी बहुत  राति भऽ गेल । आब खाना खाऽ के आराम करू ।

राक्षस : हेतै चलु !

( खाना खाऽ के दुनु बाप बेटी सुति रहैत अछि । बिहान उठि के फेर बेटी के मुडी लट्का दैत अछि आ अपने शिकार मे निकैल जाईत छथि । राक्षस के गेलाकऽ बाद लाल कनियाँ नवधिया के बोलबैत छथिन । )

लाल कनियाँ : कोने छी निकैल के बहार आबू पिताजी चलि गेलैन शिकार पर ।

( नवधिया फूलवारीसँ निकैल कऽ आवैत अछि । )

लाल कनियाँ : देखु काईल खिन जै तरिका से हमर मुडी जोड्ने छेलौं तहिना फेर जोडू ।

( नवधिया लाल कनियाँ के मुडी आ धर जोडैत छैक आउर लाल कनियाँ फेर उठि के खार भऽ जाइत अछि आ नवधिया सँ कहैत छथि । )

लाल कनियाँ : देखू अहाँ जे चीज लेव लेल एलौं ई सेकरा पाँव लेल अहाँ के ई नारियल के गाछमें खोता छैक ओई में एकटा मैना छैक ओकरा अहाँ के मारे पड़त ।

नवधिया : देखुँ हम अपन समान पाँव लेल यी काज करेबाक लेल तैयार छी ।

लाल कनियाँ : तऽ है ई लाल तलवार लिय आ छहमें नारियल गाछ के काटि खसाबु ।

( ओहिनती नवधिया नरियल गाछ के काटै यऽ तेनहायते राक्षस के परिमें ठेस लागैत छैक आ राक्षस के मालूम भऽ जाईत अछि कि हमर जान खतरामें छैक से... अप्पन बास स्थान के तर्फ राक्षस तेजी सँ चलि दैत छथि । तही बीचमें नवधिया मैंना के पकैड कऽ ओकर टांग तोरि दैत छथि कि तखने राक्षस लंगड़ा भऽ जाईत छैक, तहियो राक्षस लँगड़ाइत - लँगड़ाइत गडकैत फडकैत अवैत रहै अछि, कि अंतमें नवधिया मैंना के मुड़ी मचोरि दैत छैक आ मैंना के प्राण छुटि जाईत छैक आ राक्षस मरि जाईत छथि । )

नवधिया : लिय आब तऽ हम ई मैंना के मारि देलौं ! आब कहुँ कि कऽर पड़तै ।

लाल कनियाँ : देखु ई लाल तलवार हरियर तलवार संगमें लिय आ चलू अहाँ अपन घर के ओर !

नवधिया : मुदा हम जे समान लेव लेल एल छेलौं से समान ?

लाल कनियाँ : अहाँ पहिने अप्पन घर तऽ चलू ओतै भेट जाइत समान ।

नवधिया : साँचे कहैत छी नै ?

लाल कनियाँ : हँ - हँ साँचे कहैत छी हम,  अहाँ चलू तऽ सही पहिने !
( ओईठाम सँ दुनू गोटे चलि दैत अछि । जब नवधिया राज के नजदीक पहुंचैत छथि तऽ लाल कनियाँकऽ एक गाछ के निचामें बैठा दैत छथि आ कहैत छैक । )

नवधिया : देखु अहाँ अईठाम कनिक देर बैठु हम घर जाई छी अप्पन कनियाँ सँ हुकुम लेबाक लेल जे अहाँ के घर लऽ जाई कि नै लऽ जाई ।

लाल कनियाँ : अच्छा ! हेतै जाऊ ।

क्रमश :