छवि : एंकर - सोनी साह |
हमर कनियाँ घोघे तर सँ बुलेट चलबैए॥
ज्या बेर देखैछी लगैए पहिले बेर देखलौ,
छु मन्तरक' वाणि' मिनटे मिनेट चलबैए॥
अपना लए एक अक्षर कारी भैँस बराबर,
ओ कमप्यूटर सँ लक' इन्टरनेट चलबैए॥
टुटल उजड़ल फुस घरके मानि मकान,
मेहनतिएक' पर-पकवान सँ पेट चलबैए॥
रूसि' फुलि' जाए जौ ढेनमा ढेनमी हमर,
हम पेन्ठी-जुआली, ओ चकलेट चलबैए॥
घर सँ अंगना-दुआर, खेत सँ खरिहान धरि'
सभक' सेवामे दैनिकी अपन डेट चलबैए॥
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__.✍ विद्यानन्द वेदर्दी
राजबिराज, सिरहा (नेपाल)