गज़ल ~ हमर कनियाँ

छवि : एंकर - सोनी साह  
चारो पहर,छाती भित्तर,जिलेट चलबैए
हमर कनियाँ घोघे तर सँ बुलेट चलबैए॥

ज्या बेर देखैछी लगैए पहिले बेर देखलौ,
छु मन्तरक' वाणि' मिनटे मिनेट चलबैए॥

अपना लए एक अक्षर कारी भैँस बराबर,
ओ कमप्यूटर सँ लक' इन्टरनेट चलबैए॥

टुटल उजड़ल फुस घरके मानि मकान,
मेहनतिएक' पर-पकवान सँ पेट चलबैए॥

रूसि' फुलि' जाए जौ ढेनमा ढेनमी हमर,
हम पेन्ठी-जुआली, ओ चकलेट चलबैए॥

घर सँ अंगना-दुआर, खेत सँ खरिहान धरि'
सभक' सेवामे दैनिकी अपन डेट चलबैए॥
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__.✍ विद्यानन्द वेदर्दी 
राजबिराज, सिरहा (नेपाल)