Maithili Chutkula ~ पंखा

एक दिन ८० बर्खक बुढ़बा मरे-मरे पऽ रहे त उ अप्पन बुढ़िया के कहैत अछि ....!

बुढ़बा : हे सुनै है कहलाऊँ हँ की, आब हम अप्पन जिनगी के अंतिम क्षणमें आबि' चुकल छी । जल्दी सँ हमर बेटा के बुलाबू तऽ....

बुढ़िया : हँ बेटा एतहि हँ....

बुढ़बा : पुतौह के बुलाबू....

बुढ़िया : पुतौहो एतहि हँ....

बुढ़बा : हमर बेटी के बुलाबू....

बुढ़िया : बेटियो एतहि ह ब....

बुढ़बा : नाति-नातिन सब के बुलाबू....

बुढ़िया : नाति-नातिन सब एतहि हँ....

बुढ़बा : अच्छा जँ सब कोई एतहि अछि तऽ बिचला घर के पंखा किए चलि रहल अछि ???
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__✍ एस के मैथिल 
स्थान : जनकपुरधाम-१ सिता चौक,
शिवपथ रोड, धनुषा (नेपाल)