|| एक एहन परी छल || - मिथिलाञ्चल शायरी

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Monday, 12 February 2018

|| एक एहन परी छल ||

जाईत जाईत मे कनिक तका गेल,
हुनकर मुँह कनिक देखा गेल !
साइकिल हमर गिर गेल ,
ठेहुना मे चोट सेहो लागि' गेल !! [ १ ]

बड़का-बड़का आँखि' छल ,
जाहिमे एहन काजल छल !
काजल एहन देखिक,
मन हमर डोलि' गेल !! [ २ ]

केस हुनकर एहन छल,
ओहिमे लागल गजरा छल !
गजरा मे एहन महक छल,
एक महक छोड़ि' कऽ, छोड़ि' गेल !! [ ३ ]

हुनकर एहन होंठ छल,
ओहिमे लागल होंठलाली छल !
होंठलाली कऽ देखिक,
ईमान हमर डोलि' गेल !! [ ४ ]

नाक कऽ एहन नथिया छल,
बिजुरी एहन चमकैत छल !
एहन नथिया कऽ देखिक,
बिजुरी गिरा कऽ चलि' गेल !! [ ५ ]

कान मे एहन झुमका छल,
परी सँ कम नै ऊ लगैत छल !
एहन सुन्दर झुमका देखिक ,
आँखिमे समा कऽ चलि' गेल !! [ ६ ]

हुनकर रुप यौवन एहन छल,
अप्सरा सँ कोनो कम नै छल !
सुन्दर यौवन एहन देखिक,
जेना हमर दिल लऽकऽ चलि' गेल !! [ ७ ] 
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__.✍ किशोर कुमार मैथिल 
स्थान : पुर्नाही चौक, वीरपुर, बसोपट्टि,
मधुबनी, बिहार (भारत)
हाल : बेंगलुरु (भारत)

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