गज़ल ~ बेच देलियै हमर सच्चाँ प्रेम अहाँ बजार में

बेच देलियै हमर सच्चाँ प्रेम अहाँ बजार में ,
खोजि देखु अशरफ भेटत नै लाखो हजार में !!

हृदय हमर निकाएल हाथ पऽ राखि कऽ आहाँ ,
निलाम कऽ देलौ खार कऽ बीच ओहि खरिदार में !!

देख नै पेलौ आहाँ हमर भीतरी गुण सब यै ,
हम उ दीप छलौ ईजोर करै छलौ अन्हाँर में !!

एक छन लेल आहाँ सँ हम दूर कि चलि गेलौं ,
बसाए लेलौ जिनगी अपन छुट्टे घर - बार में !!

माया प्रेमकऽ गमकैत उ फूल छल अशरफ ,
जे डिबिया लऽकऽ खोजलो सँ नै भेटत संसार में !!
सरल बार्णिक बहर आखर : १८
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