जन्म दैत अछि माँ बाप करम तऽ अपनेही, भाग ~ ६

करम के डोर सँ बान्धल अछि जिनगीकऽ एक कहानी

जन्म दैत अछि माँ बाप करम तऽ अपनेही

भाग ~ ६ 



( नवधिया राजा के घर जाएत छथि। राजा द्वार पर रहै छथि । नवधिया जा के राजा के नमस्कार करैत छथि। )

नवधिया : नमस्कार राजा साहब !

राजा : नमस्कार ! आऊ बैसू !

नवधिया : राजा साहब हमरा किए बोलैलौं ह  ?

राजा : अहाँ सँ एकटा जरूरी काज पैड गेल तै ताहिसँ आहाँ के बोलेलौं ह ।

नवधिया : जी राजा साहब कहुँ ने कि काज पडल ?

( राजा ऊ लाँल निकाईल के देख दैत छैक आ कहैत छथि )

राजा : ई अहाँक अछि ? अहाँ आन्ले छलौं ?

नवधिया : जी हम आन्ले छलौं !

राजा : अहाँ ई क सँ आन्लौं ? हमरा अइके जोडा चाही ! अहाँ हमरा अइके जोड़ा लाबि दिय ।

नवधिया : अच्छा ठीक छैक राजा साहब हमरा एक सप्ताह के समय दिय अइके जोड़ा लाबि देब ।

राजा : अच्छा ठिक छै अहाँ के हम देलौं एक सप्ताह के समय ...

नवधिया : लिय तब हम जाएत छी ।  राजा साहब !

राजा : लिय जाऊ जल्दी आएब ।

नवधिया : जी हेतै ।

( नवधिया घर आवैत अछि त मेनुका हुन्का सँ पुछैत छथि ।)

मेनुका : अहाँके राजा साहब अप्पन महलमें किए बजैने छल  ?

नवधिया : राजा याह् खातीर बोलैने छल की, जे अपना सब अप्पन राजसँ आबैत काल नदीमें ओ चिज ने बहैने छली से हुनका चाही, व्याह् के लेल हमरा बोलौने छलाह ।

मेनुका : मुदा राजा साहब के कोनाक पता चलल जे अहाँके उ चीज के बारेमें जानै चाहैत अछि ।

नवधिया : हम आवैत खिन अहाँ सँ नुकाक पेंठमें धऽ लेने छलौं कि वेहें पर्सुखिन हम गडकावैत छलौं से गरैक के राजा साहब के द्वार पर चलि गेल आ ओ राजा सहाब के बेटी उठा लेलनि ताहिसँ हुनका मालुम भेल हमरा ओ चिज के बारेमें थाह छैक कहिके !

मेनुका : हम अहाँक कहने छलौं नै लिय फेक दियौ कैह के मुदा अहाँ नै मानिक हमरासँ नुका क आनि लेलौं आब भेल ने फसाद ! अच्छा कोई बात नै  जाउ हुनका हुनकर जोडी आनि दियौ ।

नवधिया : अच्छा ठीक छै हमरा बटखर्चा के जोगार कऽ के दिय हम जा रहल छी ।

मेनुका : कनिक रूकु , लिय ऐमें जलखै अछि , बाटमें  भुख लागत तऽ खाऽ लेब 

नवधिया : हेतै ! लिय हम जाएत  छी ।

मेनुका : जाऊ जल्दी आबि  घुरि  क ...

नवधिया : अच्छा हेतै !

क्रमश :