गज़ल ~ आई कतेक बरख पर चान जगलै !!


आई कतेक बरख पर चान जगलै ।
मन्दिरमें सुतल ओ भगवान जगलै ।।

जे कम्मल तरमे घीऽ पीबै जेठ माहमे ।
एकैह ललकारमे ओ इंसान जगलै ।।

शान्तिक लेल जे मांग करै क्रांति ।
फुनफुनीके जगबैत जवान जगलै ।।

लगैए हेतै आब लोहालराइ फेर ।
जेना गरीबहेके लेल शैतान जगलै ।।

हँसी लगई खूब रसियाक बात पर ।
कहैछै आई बुद्धक नै गियान जगलै ।।