
कहिँ हमरो जौ बहिन रहैतियै
आइ एहेन नञि दिन रहैतियै॥
बन्हाबितौ रक्षाक' बन्हन हमहुँ,
खाली हाथ ई रङ्गीन रहैतियै॥
उतारितै नजैर-गुजैर लगा टिका,
जीवनपथ नञि कठिन रहैतियै॥
सदिखन लक्ष्मी समान पूजितौ,
भगवानो सँ बेस पसिन रहैतियै॥
पाबि नेह जिनगीमे विद्यानन्दके,
अमन- चयन आ निन रहैतियै॥
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__.✍ विद्यानन्द वेदर्दी
राजबिराज, सिरहा (नेपाल)