मैथिली लप्रेक ~ मिथिलाके सब कवि



__✍ विन्देश्वर ठाकुर 
जनकपुर धाम (नेपाल)
हाल : दोहा, क़तार 



- अएं ये, सुनैछी?
- कि?
- नै नै, कहूं त मिथिलाके सब कवि कतारे कोना चलि गेलियै??
- जा! कि भेल अहाँके? एना किए बजैछी?
- नै सएह कहलौं-"जे ज'त त'त बस कविए देखा रहल छी ...
- दुर पगली! यै हमसब त बस अपन माटि-पानि सँ दूर आ अहाँके इयादमे किछु लिखि लैत छी। आब एकरा कवि कहैछै सबकिओ त हमसब क करी.?????


गज़ल ~ प्रीतम अहाँक प्रीतमे

ठोरहक बंद मुस्की हम, निहारैत गेलौं
प्रीतम अहाँक  प्रीतमे मन, हारैत गेलौं

फटकारले अपन  इ  नयनसँ, अहाँक
अंग अंगकें  मटक सभ, बिचारैत गेलौं

एक - एक नयनक पलक गिनिक, हम
मनक पना  पऽ कलमसँ , उतारैत गेलौ

कोन  देवता बनौलक अहाँक, बनाबट
रुप  देखिते मनक  दिप, पजारैत गेलौ

पजिरिया लेलकै उ रुपक, दुकानमे जौ
हमहुँ   प्रेम  जाल  मनमे,  पसारैत गेलौं
सरल वार्णिक वर्ण-१६
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__.✍ राम सोगारथ यादव 

|| भूतपूर्व प्रेमिका आ अनुपम प्रेम ||

छवि : मैथिली गायिका आ RJ अंजू यादव
ढकियाभरि प्रेम रहै
अहाँ लेल छातीमे
से की ! अहाँ बुझलियै ?
लिखल एकटा लेटर रहै
खुन सँ अहाँ लेल
से की ! अहाँ देखलियै ?
बुझबै कोना ?
देखबै कोना ?
किछु कहब तखन ने !
कारण एक्कहिटा -
हम प्रेम अहाँ सँ नहि,
करैत रही अहाँक
बिचार सँ
व्यवहार सँ आ
अहाँसंग सरोकार राखैबला
समुच्चा प्रकृति सँ।

ओ जे गुलाब रहए अहाँक रोपल
महमहबैत छलै हमरा
से की ! पता चलल अहाँके ?
ओ जे तुलसी रहए अहाँक रोपल
गमकबैत छलै हमर
जिनगीक चौड़ा
से की ! जानकारी भेटल अहाँके ?
भेटत कोना ?
किओ किछु कहत तखन ने !
छोडि अपन नैहर
गेलियै जे प्रीतम घर
ओरीया देशमे .....

ओ जे हावा
अहाँके छुबिक'
पहुँचैत छल हमराधरि
से की ! अहाँ जनलियै ?
ओ जे कोईली
अहाँके देखिक'
गीत गबै हमरा लेल
से की ! अहाँ सुनलियै ?
जनबै कोना ?
सुनबै कोना ?
किछु महशुस हेत तहन ने ?
कारण इएहटा:
हमर प्रेम
केवल पाएब नइ
समर्पण सेहो रहैक-
अहाँ लेल।

ओना त,
कतेक बेर भेल जे
कहिदी अहाँके
अप्पन मोनक बात
मुदा क'ह' सकलौं कहाँ ?
कहियो/कखनो ........

एखन खाडीमे -
जखन देखैत छी खजुरके गाछ
लागैए एना जेना -
देखाएल अहाँके
फहरल केश।
नजरि पडैए समुन्दरमे
बुझाइअ एना जेना -
देखाएल अहाँके
मनोहर छाह।
देखैत छी मजरामे
बालुपरके हरियरका सब्जी
लगैए एना जेना -
देखाएल अहीँके
हरियरका ड्रेस।

मुदा,
हिरनीसन चाल चलैत
पतरकी कमरबाली
ये हमर रामदुलारी !
किए ने देखाइतछी अहाँ
हमरा कतौ एकसाथ ??
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__✍ विन्देश्वर ठाकुर 
जनकपुर धाम (नेपाल)
हाल : दोहा, क़तार 


गज़ल ~ संगे रहब

जगले छी
भगले छी

अँहु आउ
तकले छी

छोडब नै
लगले छी

धनकल नै
पकले छी

संगे रहब
बँटले छी
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|| उगि गेल चौठी चान ||

उगि गेल चौठी
के चान
खाली हाथ
नै देखू कियो
हम होई
अथवा
होई आन !
दही के
मट्कुरी लिय
या
लिय पुरुकिया के
पँपथिया
सब गोटे कर जोरि
करू प्रणाम !!
मिथ्या कलंक सँ दूर
राखौउथ
राखौउथ जिनगी
निष्कलंक
मरर फोरू बैसू
निकालि खराम !!
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__.✍ हरेकृष्णा ठाकुर 
मधुबनी, बिहार
हाल : गौहाटी

|| पावनि चौठीचान ||

घर-घर पाड़ल अरिपन देखियौ
पसरल पुरी पकवान छै
मेघ त'र सँ चंदा निकलल
पावनि चौठीचान छै।
खाजा लड्डू दही केरा
आओर पान मखान छै
प्रथम पूज्य आई घर-घर अओताह
पारवतीक संतान छै
मेघ त'र.... पावनि........!

धीआ-पुता सब महा प्रसन्न छथि
उगताह चान लपकताह पूआ
निष्कंलक चान आ रोहिणी सँ
मैया मगतीह काया-धूआ
महाराज महेश ठाकुरक पौत्र हेमाङ्गद के
आरम्भ कैल विधान छै
मे'घ त'र.....पावनि.........!

दादी मैया हाथ उठएथिन्ह
बाबू कटता म'र'र
फूल-फल लए गोर लगै जाउ
पावनि मिथिलाक महान छै
मेघ त'र सँ चंदा निकलल
पावनि चौठीचान छै........!
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__.✍ प्रियरंजन झा 
दरभंगा, बिहार 



गज़ल ~ अबला नारी

अबला नारी छी हम अहाँ लेल
तइँ सरकारी छी हम अहाँ लेल॥

जनमेसँ नञि पेटहिके भित्तरसँ,
माथक भारी छी हम अहाँ लेल ॥

कतबो जँ पसारि दी ईजोरिया,
झामर कारी छी हम अहाँ लेल ॥

हत्या-हिसांक दोकान पर भेल ,
नित उधारी छी हम अहाँ लेल ॥

साँस छिनि जोतैत- जीवैत रहु ,
मसिन गाड़ी छी हम अहाँ लेल ॥

अहाँके दिलक दैव दुष्ट बनल,
तैयो पूजारी छी हम अहाँ लेल ॥
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__.✍ विद्यानन्द वेदर्दी 
राजबिराज, सिरहा (नेपाल)

हे वीर मधेशी ध्यान धरु (क्रान्ति कविता)

हे वीर मधेशी ध्यान धरु
 अपन स्तर पहिचान करु
 छी बापक जन्मल बेटा जँ
 माँ मिथिलाके के उद्धार करु
 हे वीर मधेशी .........

लेहु स लतपत भेल मधेश
 आबो एकरा समाधान करु
 जे टुटि पडल अछि मिथलापर
 ओकरो घरके समसान करु
 हे वीर मधेशी ध्यान धरु .....

अहीँके श्रम सँ देश बनल
 अहीँके त्याग सँ जगमग छै
 छै मुदा ने तैयो मोल कोनो
 शोषण हर ठाँ आ हरदम छै
 जँ आन यै अपना पुर्खाके त
 एहि बातक उपदान करु
 हे वीर मधेशी ..........

अछि कतौ बापक लास पडल
 कतौ माएक चीतकार सुनए
 अछि सोनितके गंगा कोम्हरो
 कियो बहिनेके बलत्कार करए
 छी एक बापके जन्मल जँ
 बिरुद्ध एकर प्रतिकार करु
 हे वीर मधेशी ..........

देखियौ न ककरो घर जरए
 केम्हरो देखियौ पत्रकार मरए
 जे सूचना दैए सही सदगुण
 ओकरे प' पुलिस टुटि पडय
 नै छोडी कलम
 सत्य मुदा
 अन्याय बिरुद्धक जंग लडु
 हे वीर मधेशी ..........
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__✍ विन्देश्वर ठाकुर 
जनकपुर धाम (नेपाल)
हाल : दोहा, क़तार 

|| घूरि आउ कान्हा ||

हे नटवर गीरीधर गीरीधारी ।
केशव माधव कृष्ण मुरारी ।।
बाट जोहैथ राधा आठो याम यौ ।
घूरि आउ कान्हा गोकुल धाम यौ ।

सुन जमुना तट, उदास छै गैया ।
बाट जोहै छथि, यशोदा मैया ।।
वृंदावनकेँ कण-कण जपय नाम यौ ।
घूरि आउ कान्हा ----

मन मोहन मोहल मोन अहाँ कोना ।
वंशीक तान मोहक मुस्कीमे टोना ।।
गोपी बिकायल नेने बिनु दाम यौ ।
घूरि आउ कान्हा ---
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__✍ मैथिल प्रशान्त 
दुर्गौली, बेनीपट्टी (भारत)

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