|| अभगली हम ||

वर्षो सँ पिया उ
मिलन रातिक बाट
जोहैत छलौं हम !
अहाँ आबि एक दिन
हमरो मोनक आस
पूरा हेतै नितदिन !!
मारैत रहै आस परोसी
सब ताना, कैह क....
अभागली के
नसीब एकर केहन !
जे भरले लगनमें
बिपतिया
चलि गेलै छोड़ि,
कुलच्छनी के
कलशक
डेग छलै केहन !
अहाँक बिरह में
रोज कोना
जिबैत छलौं हम !
बिरहक आगि में कोना
जलैत छलौं हम
तड़पैत छलौं अहाँक
याद में
जेना पानि बिनु मछली
तड़पैत रहै !!
हरपल मरैत अछि !
अहिंक यादमें....
ई पगली, ई अभगली हम !!
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__✍ एस के मैथिल 
स्थान : जनकपुरधाम-१ सिता चौक, 
शिवपथ रोड, धनुषा (नेपाल)


गज़ल ~ मारै स्टाइल सजनी

नंबर जे केलियै डाइल सजनी गे ।
बिजी पियाकेँ मोबाइल सजनी गे ।।

ननदि बसै मोरा फेसबुक नगरिया
दियोर मारै स्टाइल सजनी गे ।।

नम्हर नम्हर मैसेज हम केलियै,
ओ फोटो भेजै स्माइल सजनी गे ।।

कोन रे सौतिनिया पिया मोन मोहलक ,
बदलल लागैए चाइल सजनी गे ।।

सासुजी बेदरदी पियाजीकेँ रोकलक,
पंचमीमे सुन्न घर-दुआरि सजनी गे ।।
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__✍ मैथिल प्रशान्त 
दुर्गौली, बेनीपट्टी (भारत)

Maithili Shayari ~ इश्क़ हमरा बदनाम





इश्क़ हमरा बदनाम कऽ देलक,
सब ख़ुशीसँ अंजान कऽ देलक !
हम नई कहियो चाहलौं की हमरा इश्क़ होइ,
मुदा, हुनकर नज़र हमरा नीलाम कऽ देलक !!
                                  दिलिप कुमार यादव 

|| वादा ||

छवि : मैथिली फ़िल्म एक्ट्रेस - डोली सरकार 
उ वादा,
कसम, किरिया
सब छल
अहाँक झूठा,
पल भरमें
आन कएलौं
अहाँ !
दश लोगमें
गुनेहगार
ठहरेलों अहाँ,
बात त
करैय छलौं अहाँ
बड़का-बड़का
अहाँक बात पर
छल विश्वाश हमरा
मुदा उ वादा,
कसम, किरिया भूलि
दश लोगमें
अविश्वाशी बनेलौं अहाँ !!
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__✍ एस के मैथिल 
जनकपुरधाम, धनुषा (नेपाल)

गज़ल ~ मोन हमर मोहि लिय

छवि : मैथिली एक्ट्रेस - मोनिका दहाल 
जे कहबाक अछि फोने मे कहि लिय प्रिय ।
फोटो देखिएक' अहाँ हमर रहि लिय प्रिय ॥

बहुते केलौ प्रतीक्षा किछु दिन अाअोर सहि ।
बस कहुना क' सुख-दुःख सहि लिय प्रिय ॥

लिखल अछि कपार मे तहन हमर कि दोख ।
दू चारि मास अाअोर बाट जोहि लिय प्रिय ॥

हमरे नाम के मेहदी सजत' अहाँक हाथ मे ।
प्रेम मे दिन तिल, चाउर बहि लिय प्रिय ॥

दिनो दिन कसगर होयत जेतै प्रितक डोर ।
अनेरे बमछैत छै मोन हमर मोहि लिय प्रिय ॥
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__✍ राजदेब राज 

|| अखारक महिना, पियाक सन्देसा ||

बर्खा-बर्खा, चारुदिस बर्खा,
आएल अखारक महिना यौ !!
बारिए झारिए बेङ कुहकैए,
होइये दिनभर बर्खा यौ !!

एह छै अखारक महिना यौ साजन,
आबैय अहाँक बहुत याद यौ !
कहिया आएब अहाँ घर आँगन मे,
नितदिन बाट जोहैछी यौ !!

घर सँ गेला एतेक दिन बितल,
चिठ्ठी नै कोनो सन्देसा यौ !
अखारक महिना अहाँक याद,
लगैय बिरहा सन दुखियारी यौ !!

अहाँक यादमे दिनभर कानैछी,
कहिया घर अहाँ आएब यौ !!
अरोसी-परोसी सब केउ आएल,
अहाँ कहिया दिन जुराएब यौ !!

चारूदिस पसरल धानक बिच्छन,
कहिया रोपनी होएत यौ !
खेती किसानी नै करब तऽ
कोना क सालभर खाएब यौ !!
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__.✍ दिनेश कुमार राम 
सुगा मधुकरही - ६ धनुषा,
हाल : दोहा कतार

Maithili Shayari ~ जिनगी में कहियो




जिनगी में कहियो भी 
किनको लेल,
नोर नै बहाबि अहाँ !
उ अहाँक नोरक काबिल नहीं होत, 
आ जे अहाँक नोरक काबिल होत,
उ अहाँक रोब नई देत !!

Maithili Chutkula ~ अहाँक कनियाँ के की सब बनाब अबैय ....

छवि : मैथिली एक्ट्रेस - सरिता साह 
ढोंरबा : कि... दोस, केना अछि.... जहिया सँ विवाह कैलौँ अपने,
            हमरा तऽ भूलि' जेना गेल छी।

सुरतिया : कि... कहु दोस कनियाँ के हाथ सँ नव-नव पकवान दिन राति' खाइत छी।
                जे कहैत छियै से सब बनाबि' दैत अछि।

ढोंरबा : एह ! खाऊ-खाऊ अपनेही के समय आएल अछि।
           ( हमर तऽ कपारे फुटल अछि' )

सुरतिया : हरेक पकवान बनाबि' लैत छैक उ, मुदा
               दोस अहाँक कनियाँ के की सब बनाब अबैय ....

ढोंरबा : हमर कनियाँ के ?
            हमर कनियाँ के खाली मुँह बनाबए अबैत छैक !
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__✍ एस के मैथिल
जनकपुरधाम, धनुषा (नेपाल)

गज़ल ~ हमर कनिया

छवि : एंकर - सोनी साह  
चारो पहर,छाती भित्तर,जिलेट चलबैए
हमर कनिया घोघे तर सँ बुलेट चलबैए॥

ज्या बेर देखैछी लगैए पहिले बेर देखलौ,
छु मन्तरक' वाणि' मिनटे मिनेट चलबैए॥

अपना लए एक अक्षर कारी भैँस बराबर,
ओ कमप्यूटर सँ लक' इन्टरनेट चलबैए॥

टुटल उजड़ल फुस घरके मानि मकान,
मेहनतिएक' पर-पकवान सँ पेट चलबैए॥

रूसि' फुलि' जाए जौ ढेनमा ढेनमी हमर,
हम पेन्ठी-जुआली, ओ चकलेट चलबैए॥

घर सँ अंगना-दुआर, खेत सँ खरिहान धरि'
सभक' सेवामे दैनिकी अपन डेट चलबैए॥
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__.✍ विद्यानन्द वेदर्दी 
राजबिराज, सिरहा (नेपाल)

गज़ल ~ पूरा कदे हमर ईक्षा गै जूली

छवि : मैथिली फ़िल्म एक्ट्रेस - डोली सरकार 
 बस पूरा कदे हमर एकटा ईक्षा गै जूली !
हमरा सँ लले प्रेम बला शिक्षा गै जूली !!

दीवाना छी तोहर चाहे खूआले कोनो किरिया !
बात मान आब नञि' कराबै तू प्रतिक्षा गै जूली !!

तोरा बिन हमर जीनगीक' कोनो मोल नञि' !
जिनगीक' संगी बनि' दे प्रेमक' सदीक्षा गै जुली !!

बानहि' दे तू प्रितक' डोर सँ सदित बनहायल रहब !
आब हमारा सँ नञि' लए तू परीक्षा गै जूली !!

बस एक बेर नयन सँ नयन मिलाक' देख बताहि' !
बतहा "राज" मगैत छौ प्रेमक' भिक्षा गै जूली !!
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__✍ राजदेब राज 
चौहर्वा, सिरहा (नेपाल) 
हाल : मलेसिया 

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