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【 मैथिली फकरा ~ १५ 】






बिलाई गेल
भांटा बाड़ी
कहलक
यैह छै वृंदावन  


मैथिली लप्रेक ~ मिथिलाके सब कवि



__✍ विन्देश्वर ठाकुर 
जनकपुर धाम (नेपाल)
हाल : दोहा, क़तार 



- अएं ये, सुनैछी?
- कि?
- नै नै, कहूं त मिथिलाके सब कवि कतारे कोना चलि गेलियै??
- जा! कि भेल अहाँके? एना किए बजैछी?
- नै सएह कहलौं-"जे ज'त त'त बस कविए देखा रहल छी ...
- दुर पगली! यै हमसब त बस अपन माटि-पानि सँ दूर आ अहाँके इयादमे किछु लिखि लैत छी। आब एकरा कवि कहैछै सबकिओ त हमसब क करी.?????


गज़ल ~ प्रीतम अहाँक प्रीतमे

ठोरहक बंद मुस्की हम, निहारैत गेलौं
प्रीतम अहाँक  प्रीतमे मन, हारैत गेलौं

फटकारले अपन  इ  नयनसँ, अहाँक
अंग अंगकें  मटक सभ, बिचारैत गेलौं

एक - एक नयनक पलक गिनिक, हम
मनक पना  पऽ कलमसँ , उतारैत गेलौ

कोन  देवता बनौलक अहाँक, बनाबट
रुप  देखिते मनक  दिप, पजारैत गेलौ

पजिरिया लेलकै उ रुपक, दुकानमे जौ
हमहुँ   प्रेम  जाल  मनमे,  पसारैत गेलौं
सरल वार्णिक वर्ण-१६
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__.✍ राम सोगारथ यादव 

|| भूतपूर्व प्रेमिका आ अनुपम प्रेम ||

छवि : मैथिली गायिका आ RJ अंजू यादव
ढकियाभरि प्रेम रहै
अहाँ लेल छातीमे
से की ! अहाँ बुझलियै ?
लिखल एकटा लेटर रहै
खुन सँ अहाँ लेल
से की ! अहाँ देखलियै ?
बुझबै कोना ?
देखबै कोना ?
किछु कहब तखन ने !
कारण एक्कहिटा -
हम प्रेम अहाँ सँ नहि,
करैत रही अहाँक
बिचार सँ
व्यवहार सँ आ
अहाँसंग सरोकार राखैबला
समुच्चा प्रकृति सँ।

ओ जे गुलाब रहए अहाँक रोपल
महमहबैत छलै हमरा
से की ! पता चलल अहाँके ?
ओ जे तुलसी रहए अहाँक रोपल
गमकबैत छलै हमर
जिनगीक चौड़ा
से की ! जानकारी भेटल अहाँके ?
भेटत कोना ?
किओ किछु कहत तखन ने !
छोडि अपन नैहर
गेलियै जे प्रीतम घर
ओरीया देशमे .....

ओ जे हावा
अहाँके छुबिक'
पहुँचैत छल हमराधरि
से की ! अहाँ जनलियै ?
ओ जे कोईली
अहाँके देखिक'
गीत गबै हमरा लेल
से की ! अहाँ सुनलियै ?
जनबै कोना ?
सुनबै कोना ?
किछु महशुस हेत तहन ने ?
कारण इएहटा:
हमर प्रेम
केवल पाएब नइ
समर्पण सेहो रहैक-
अहाँ लेल।

ओना त,
कतेक बेर भेल जे
कहिदी अहाँके
अप्पन मोनक बात
मुदा क'ह' सकलौं कहाँ ?
कहियो/कखनो ........

एखन खाडीमे -
जखन देखैत छी खजुरके गाछ
लागैए एना जेना -
देखाएल अहाँके
फहरल केश।
नजरि पडैए समुन्दरमे
बुझाइअ एना जेना -
देखाएल अहाँके
मनोहर छाह।
देखैत छी मजरामे
बालुपरके हरियरका सब्जी
लगैए एना जेना -
देखाएल अहीँके
हरियरका ड्रेस।

मुदा,
हिरनीसन चाल चलैत
पतरकी कमरबाली
ये हमर रामदुलारी !
किए ने देखाइतछी अहाँ
हमरा कतौ एकसाथ ??
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__✍ विन्देश्वर ठाकुर 
जनकपुर धाम (नेपाल)
हाल : दोहा, क़तार 


गज़ल ~ संगे रहब

जगले छी
भगले छी

अँहु आउ
तकले छी

छोडब नै
लगले छी

धनकल नै
पकले छी

संगे रहब
बँटले छी
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|| उगि गेल चौठी चान ||

उगि गेल चौठी
के चान
खाली हाथ
नै देखू कियो
हम होई
अथवा
होई आन !
दही के
मट्कुरी लिय
या
लिय पुरुकिया के
पँपथिया
सब गोटे कर जोरि
करू प्रणाम !!
मिथ्या कलंक सँ दूर
राखौउथ
राखौउथ जिनगी
निष्कलंक
मरर फोरू बैसू
निकालि खराम !!
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__.✍ हरेकृष्णा ठाकुर 
मधुबनी, बिहार
हाल : गौहाटी

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